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बस तुम मुझें समझना

 जब सब समझना बंद कर दे मुझें  तब तुम समझने की कोशिश करना  ज़ब मैं बोलते बोलते चुप हो जाऊ कभी  तब मेरे उस मौन में मेरी व्यथा को समझना  मैं परेशान होने पर भी कभी नहीं कहती  बस उस वक्त मेरे गिरते हुए आँसुओं को समझना  दम घुटता है मेरा लोगों की भीड़ मैं अक्सर  मेरी उस समय की चिड़चिड़ाहट को समझना   सुनो मेरी अब हर ख्वाइश तुमसे हैं  पर उस ख्वाब तुम कैसे हो इस बात को समझना  अब तक घर में सबको सम्हाला हैँ मैंने  पर अब थक के टूट गई हूं मैं मेरी इस थकान को समझना  बहुत साधारण सी लड़की हूँ मैं  तुम ना समझे तों खुद से हर जाउंगी इस बात को समझना।❤️

कुछ ठीक नहीं

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जिंदगी एक अजीब कसमक्स मे हैं  जहाँ सब ठीक तो लगता हैं  पर मन कहता हैं कुछ ठीक नहीं। एक नये रिश्ते में जुड़ गई हूँ  उम्मीदों की गठरी बाधे चल रहीं हूं  पर मन कहता है कुछ तो ऐसा हैं जो ठीक नहीं। हस्ती हूं बेमतलब भी मुस्कुराती हूं  छुपा लेती हूं अनकही  बातें हर गम को  फिर भी मेरे कुछ अपने समझ जाते हैं कुछ तो ठीक नहीं।

आशुतोष

शिव को तो नही भजा मैंने  फिर भी आशुतोष मिला  चंचल गंगा सी में... उसने उन्मुक्त अपने शीश रखा  बांध कर बंधन में मुझकों फिर भी आजाद रखा  उठते होंगे कई सवाल उसके मन मे भी फिर भी उसने खुद को खामोश रखा  बातें दुनियां दारी की सब समझ आती है उसको फिर भी उसने खुद को दर किनार रखा 

कमल

कमल पुष्प राजी प्रिय प्यारी अष्ठ दल की शोभा निरखु जाउ वारी वारी श्री राधिका जी के प्रिया सांझी उत्सव की बधाई  मनवांछित फल पाइए जो कीजे इहि सेव।  सुनो कुंवरि वृषभान की यह साझी सांचौ देव।

फ़ागुन

खेलत रहो फ़ाग मेरी अखियन के आगे कबहू कुंजन कबहू निकुंजन रह्यो प्रेम रस माते गोपयन सम्मुख खेलत होरी केसर अबीर पट बाँधे  फ़ागुन मास लगत अति प्यारो मिटत ताप जियरा के

कब दरशन पाऊ

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किशोरी कब तुम्हरें दर्शन पाऊ जग की सताई कीत में जासी चरण रज मिल जाऊँ। लोग हँसत दिन रैन मै रोऊ द्वार तिहारे बस जाऊं। कहनी थी जो बात ह्दय की तुम्हरे मुख सुन पाऊँ। नख शिख ज्योति देख सर्वस्व हारी दरश बिना ना  मर जाऊँ गुरुदेव को हो तुम प्राणधन प्यारी भान अली ह्दय बीच बसाऊँ।

दर

इस तलब की इंतिहा इतनी कर दे पलक झपकूँ तो मुझे तू दिखाई दे तमाम शिकायतों के बाद भी मुझे सिर्फ तू चाहिए हर दिन जब याद आती है मुझे तेरी एक पल ही सही याद तो तूने भी किया होगा। तूने ही सिखाया है हर दर पर झुकना मुझे हर दर पे मैं मांगा नहीं करती। छोड़ दिया मैने शिकायतें, मिन्नतें, करना अब क्या तुझे पता नही मुझें क्या चाहिए। झूठी ही सही तसल्ली तो दे जल्दी मिलूंगा इतना कह दे