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Showing posts from March, 2025

प्रिया

दोहा - हठ छोड़ो प्यारी राधिका ,होरी खेलन आयो ब्रज राज कर जोड़  बिनती करे  बिनती करे, कृष्ण तुम्हारो आज। ये  तो सैन मार हस जाए ,मेरो मदना  बड़ो रसीलो सो याके आंखन को कजरा जुलम करे ,होरी में ये उदम खूब करे..ये तो नैनो के बाण चलाए । मेरो मदना बड़ो रसीलो सो।।1 ये तो रसिया बहुत रसिलो है ,ये तो छैला बहुत रंगीलो है  लाला मोहे कुंजन मे ले जाएं ।मेरो मदना बहुत रसिलो सो।।2 मेरे ब्रज की होरी न होरा है, प्यारो शुक नैनन को हीरा है  यापे प्रियाशु बलि बलि जाएं। मेरो मदना बड़ो रसीलो सो।।3 ✍️✍️प्रियांशु शर्मा

रंग बिन होरी

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कभी तू भी तो इंतजार कर मेरे आने का मिलने पर जब निगाहें चार होगी  उसमें दो तेरी भी तो होगी। मेरा तुझसे मिलकर बस रोये जाना रोये जाना बड़ी गज़ब मोहोब्बत हैं तेरी..... मुझें रोता देख तेरा हँस जाना। तेरे दीदार का किस्सा भी अजीब हैं तुझसे मिलकर भी रोना .... तेरी याद में भी रोना... खेलनी हैं फ़ाग तो अपने रंग में रंग कहवे हैं कारें पे दुसरो कोई रंग ना चढ़े। ना अवीर ना रोरी मोपे ना फूलन की होरी बोरू अबकी नैनन के झर में ना खेलूं रंग होरी।

रमणा

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बैठकर तेरी चौखट पर खाली हो जाऊं मैं. बहुत भर दिया है इस जग ने ओ रमणा। तू ही बता तुझे छोड़ अब कहाँ जाऊ मैं सबसे बातें की हँस मुस्कुराके की। दिल के दर्द को कहा रोने जाऊ मै।  अपनी मस्ती में मस्त हैं जग वाले क्या इस आंसुओं को तुझे से भी छुपाऊँ मैं।