कुछ ठीक नहीं
जिंदगी एक अजीब कसमक्स मे हैं
जहाँ सब ठीक तो लगता हैं
पर मन कहता हैं कुछ ठीक नहीं।
एक नये रिश्ते में जुड़ गई हूँ
उम्मीदों की गठरी बाधे चल रहीं हूं
पर मन कहता है कुछ तो ऐसा हैं जो ठीक नहीं।
हस्ती हूं बेमतलब भी मुस्कुराती हूं
छुपा लेती हूं अनकही बातें हर गम को
फिर भी मेरे कुछ अपने समझ जाते हैं कुछ तो ठीक नहीं।
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