दर

इस तलब की इंतिहा इतनी कर दे
पलक झपकूँ तो मुझे तू दिखाई दे


तमाम शिकायतों के बाद भी
मुझे सिर्फ तू चाहिए


हर दिन जब याद आती है मुझे तेरी
एक पल ही सही याद तो तूने भी किया होगा।

तूने ही सिखाया है हर दर पर झुकना मुझे
हर दर पे मैं मांगा नहीं करती।

छोड़ दिया मैने शिकायतें, मिन्नतें, करना अब
क्या तुझे पता नही मुझें क्या चाहिए।


झूठी ही सही तसल्ली तो दे
जल्दी मिलूंगा इतना कह दे

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