फ़ागुन

खेलत रहो फ़ाग मेरी अखियन के आगे
कबहू कुंजन कबहू निकुंजन रह्यो प्रेम रस माते
गोपयन सम्मुख खेलत होरी केसर अबीर पट बाँधे 
फ़ागुन मास लगत अति प्यारो मिटत ताप जियरा के

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