ऐसी कैसी बनाई मै प्रियतम

ऐसी कैसी बनाई मैं प्रीतम तेने
काहू सो मिलवो ना सुहावे बातन सो घवरावे।
बैठी रहू कोने में सग दिन,रात नींद ना आवे
साज शृंगार सगरी मै भूली,ये नैन नीर ढ़ारावे
गुरुदेव कृपा सो सब जग छूटो, भान अली निरखत ही सुख पावे।

भानुजा✍️✍️

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