लाड़ लड़ाऊँ

मदन मोहन तोहे लाड़ लड़ाऊँ।
प्यारी को प्यारों प्रियतम हैं
जापे बलि बलि जाऊ

नव नव भोग चंदन चौकी पर
प्यारे बीड़ी कर पकडाऊँ।

तुम्हरे बिन मोहे चैन कहा हैं
देखत ही सुख पाऊं

सुनी जब ते पाव की पैजनियाँ
सगरे साज भुलाऊँ।

छवि तोरी मन में बसी हैं
नित नव दर्शन पाऊँ

भान अली को प्यारो रमणा
गुरुदेव कृपा सो पाऊं

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