रंग बिन होरी

कभी तू भी तो इंतजार कर मेरे आने का
मिलने पर जब निगाहें चार होगी
 उसमें दो तेरी भी तो होगी।


मेरा तुझसे मिलकर बस रोये जाना रोये जाना
बड़ी गज़ब मोहोब्बत हैं तेरी.....
मुझें रोता देख तेरा हँस जाना।

तेरे दीदार का किस्सा भी अजीब हैं
तुझसे मिलकर भी रोना ....
तेरी याद में भी रोना...

खेलनी हैं फ़ाग तो अपने रंग में रंग
कहवे हैं कारें पे दुसरो कोई रंग ना चढ़े।

ना अवीर ना रोरी मोपे ना फूलन की होरी
बोरू अबकी नैनन के झर में
ना खेलूं रंग होरी।


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