किशोरी कब तुम्हरें दर्शन पाऊ जग की सताई कीत में जासी चरण रज मिल जाऊँ। लोग हँसत दिन रैन मै रोऊ द्वार तिहारे बस जाऊं। कहनी थी जो बात ह्दय की तुम्हरे मुख सुन पाऊँ। नख शिख ज्योति देख सर्वस्व हारी दरश बिना ना मर जाऊँ गुरुदेव को हो तुम प्राणधन प्यारी भान अली ह्दय बीच बसाऊँ।
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